Monday, January 6, 2020

डाकू का ख़ौफ़ ओर परमात्मा की लीला



                      ||| गुरु ही भगवान है |||





  यह एक सच्ची घटना है। करीब 30-35 वर्ष पहले एक कस्बे में एक सेठ रहा करता था जिसका पूरा परिवार गरीबदास पंथ के एक संत से नामदीक्षा लेकर भक्ति करता था।
उस समय डाकुओं का आतंक था। वे धन के लोभ में किसी की भी हत्या कर दिया करते थे। इसलिए उस कस्बे के लोग शाम 06.00 बजे के बाद घर से बाहर नहीं निकलते थे और जिस भी परिवार का सदस्य 06:00 बजे तक घर नहीं पहुंच पाता तो उसे मरा हुआ समझा जाता था।

एक दिन वह सेठ (जिसने गरीबदास पंथ के संत से नाम दीक्षा ले रखी थी) शाम को अपने कार्यालय का कार्य खत्म करके घर लौट रहा था तो रास्ते में दो डाकुओं ने उसे पकड़ लिया और अपने साथ ले जाकर अनजान जगह पर रखकर ईख (गन्ना) के पौधे से बांध दिया। दोनों डाकुओं ने शराब के नशे में होने के कारण सोचा कि सुबह इस सेठ से पूछेंगे कि तूने धन कहाँ रखा है और वहीं पर सो गए।

सेठ बहुत डर गया था तो उसने मन ही मन अपने गुरु जी से प्रार्थना की कि हे गुरुदेव जी! इस दास को बचा लो। अब सब कुछ आपके ही हाथ में है तो उसी समय भगवान ने उसके गुरु जी के रूप में आकर उसे बचा लिया और उसे उसके घर छोड़कर चले गए। जब सुबह हुई तो सेठ के साथ उसका पूरा परिवार गुरु जी से मिलने आश्रम गया। आश्रम में देखा तो गुरु जी बीमार थे, तभी सेठ ने बताया गुरुजी आपने तो चमत्कार कर दिया और रात की पूरी घटना बताई। तब गुरुजी ने कहा कि मैं तो रात से बीमार हूँ और खाट(चारपाई) पर ही पड़ा हूँ। वह तो भगवान ही थे जिन्होंने मेरे रूप में आकर आपको बचाया। सेठ और उसका पूरा परिवार यह सुनकर आश्चर्य चकित रह गए।

इस कथा का निष्कर्ष यह है कि गुरु जी को भगवान मानना चाहिए क्योंकि, भगवान गुरु जी के रूप में हर पल हमारे साथ रहते हैं। कबीर साहेब जी ने भी गुरु की महिमा बताते हुए कहा है:

कबीर, गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागूं पायँ।
बलिहारी गुरु आपने, जिन गोविंद दियो बताय।।

अर्थात परमात्मा को प्राप्त करने का माध्यम गुरु ही है। बिना गुरु के हम परमात्मा को नहीं पा सकते हैं। अतः गुरु का दर्जा भगवान से भी बड़ा है। ऐसी ही अधिक से अधिक रोचक कथाएं पढ़ने के लिए हमारे साथ बने रहिये।

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